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संगीत के माध्यम से योगेश्वर श्रीकृष्ण जी की भक्ति और सनातन धर्म की विशेषताएं संपूर्ण विश्व तक पहुंचाने वाले माधवास रॉक बैंड को आयुष म्यूजिक लेबल एवं एटरनल जीनियस वन संस्था ने किया सम्मानित !

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उत्तर प्रदेश : अलीगढ़
30 जुलाई 2022 : संगीत एवं आध्यात्म भारतीय संस्कृति का सुदृढ़ आधार है । भारतीय संस्कृति आध्यात्म प्रधान मानी जाती रही है । संगीत से आध्यात्म तथा मोक्ष की प्रप्ति के साथ भारतीय संगीत के प्राण भूत तत्व रागों के द्वारा मनः शांति, योग ध्यान, मानसिक रोगों की चिकित्सा आदि विशेष लाभ प्राप्त होते है । प्राचीन समय से मानव संगीत की आध्यात्मिक एवं मोहक शक्ति से प्रभावित होता आया है । भारतीय संगीत का जन्म वेद के उच्चारण में देखा जा सकता है । भारतीय संगीत का सबसे बड़ा स्रोत सामवेद को माना जाता है सामवेद पूरा का पूरा संगीत का ही ज्ञान है । संगीत का सबसे प्राचीनतम ग्रन्थ भरत मुनि का नाट्‍यशास्त्र है । अन्य ग्रन्थ हैं बृहद्‌देशी, दत्तिलम्‌, संगीतरत्नाकर । शास्त्रों में संगीत को साधना भी माना गया है । प्राचीन मनीषियों ने सृष्टि की उत्पत्ति नाद से मानी है । ब्रह्माण्ड के सम्पूर्ण जड़-चेतन में नाद व्याप्त है, इसी कारण इसे “नाद-ब्रह्म” भी कहते हैं । सुव्यवस्थित ध्वनि, जो रस की सृष्टि करे, संगीत कहलाती है । गायन, वादन व नृत्य तीनों के समावेश को संगीत कहते हैं । संगीत नाम इन तीनों के एक साथ व्यवहार से पड़ा है । युद्ध, उत्सव और प्रार्थना या भजन के समय मानव गाने बजाने का उपयोग करता चला आया है । प्रामाणिक तौर पर देखें तो सबसे प्राचीन सभ्यताओं के अवशेष, मूर्तियों, मुद्राओं व भित्तिचित्रों से जाहिर होता है कि हजारों वर्ष पूर्व लोग संगीत से परिचित थे ।
“आयुष म्युजिक लेबल एवं एटरनल जीनियस वन संस्था द्वारा सम्मानित किये जाने के अवसर पर ‘माधवास’ ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि संगीत आनन्द का आविर्भाव है तथा आनन्द ईश्वर का स्वरूप है । संगीत के माध्यम से ही ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है, बस इसी बात को ध्यान में रखते हुए वह संगीत के माध्यम से संपूर्ण विश्व के लोगों को श्रीकृष्ण से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं । इसी क्रम में यह दोनों संस्थाएं भी भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में कार्यरत हैं जिसमें माधवास रॉक बैंड की पूरी टीम की शुभकामनाएं उनके साथ हैं ।”
आयुष म्युजिक लेबल के संस्थापक सिंगर आयुष सक्सैना ने कहा कि संगीत एक प्रकार का योग है । इसकी विशेषता है कि इसमें साध्य और साधन दोनों ही सुखरूप हैं । अतः संगीत एक उपासना है, इस कला के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति होती है । यही कारण है कि भारतीय संगीत के सुर और लय की सहायता से मीरा, तुलसी, सूर और कबीर जैसे कवियों ने भक्त शिरोमणि की उपाधि प्राप्त की और अन्त में ब्रह्म के आनन्द में लीन हो गए। एटरनल जीनियस वन के संस्थापक डबल ए ब्रदर्स ने बताया कि संगीत को ईश्वर प्राप्ति का सुगम मार्ग बताया गया है । संगीत में मन को एकाग्र करने की एक अत्यन्त प्रभावशाली शक्ति है तभी से ऋषि मुनि इस कला का प्रयोग परमेश्वर की आराधना के लिए करने लगे ।
इस मौके पर सिंगर आयुष सक्सैना, कृष्णभक्त अभिषेक सक्सैना, आशु सिंघल एवं प्रभांशु सक्सैना और माधवास रॉक बैंड की टीम उपस्थित रही ।

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