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UP सूचना आयुक्त चला रहे PIO पर दंड लगाने और दंड माफ करने का रैकेट – RTI Activist उर्वशी ने कहा जांच हो !

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UP सूचना आयुक्त चला रहे PIO पर दंड लगाने और दंड माफ करने का रैकेट – RTI Activist उर्वशी ने कहा जांच हो !

उत्तर प्रदेश : लखनऊ
07 जून 2022 : आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्तों पर सूचना कानून की धारा 20 के तहत जनसूचना अधिकरियों पर मनमाने ढंग से अर्थदण्ड लगाने और निहित स्वार्थ पूरे होने पर अधिरोपित अर्थदण्ड को गैरकानूनी रीति से बापस लेने का रैकेट चलाने का गंभीर आरोप लगा है । लखनऊ निवासी RTI Activist उर्वशी शर्मा ने UP के सूचना आयुक्तों पर दंड लगाने और माफ करने का रैकेट चलाने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, सूबे के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रमुख सचिव समेत सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त, रजिस्ट्रार, सचिव और उपसचिव को शिकायत भेजी है और सूचना आयोग के अभिलेखों, सूचना आयोग की CCTV फुटेज और सूचना आयुक्तों समेत उनके स्टाफ के सभी फ़ोन्स की CDR के आधार पर जांच कराकर दोषी सूचना आयुक्तों को चिन्हित करके एक्ट की धारा 17 के तहत बर्खास्त करने की मांग उठा दी है ।

उर्वशी ने अपनी शिकायत में फारुक अहमद सरकार बनाम चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स मामले, कल्पनाथ चौबे बनाम सूचना आयुक्त, 2010 (3) के मामले, रमेश शर्मा बनाम स्टेट इन्फार्मेशन कमीशन, हरियाणा, 2008 के मामले, अजीत कुमार जैन बनाम हाईकोर्ट ऑफ डेलही के मामले, यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम धर्मेन्द्र टेक्सटाइल के मामले, संजय हिंदवान बनाम राज्य सूचना आयोग मामले, और श्रीमती चन्द्र कांता बनाम राज्य सूचना आयोग मामले में न्यायालयों द्वारा दी गई विधिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ आरटीआई एक्ट की धारा 20 एवं उत्तरप्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 के हवाले से अपनी शिकायत में लिखा है कि कोई भी सूचना आयुक्त अपनी सनक और कल्पनाओं (whims and fancies) के आधार पर धारा 20 के तहत दंड अधिरोपित नहीं कर सकता है.उर्वशी ने लिखा है कि दंड अधिरोपण एक्ट की धारा 20 के अनुसार नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का अनुपालन करते हुए जन सूचना अधिकारी को अपना पक्ष रखने का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद ही लगाया जा सकता है ।

उर्वशी का कहना है कि प्रत्येक सूचना आयुक्त के पदीय दायित्व के तहत उससे यह अपेक्षित है कि वह जन सूचना अधिकारी पर RTI एक्ट की धारा 20 का कोई भी दण्ड अधिरोपित करने से पहले यह आश्वस्त हो ले कि जनसूचना अधिकारी को नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दे दिया गया है तथा उत्तरप्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 के नियम 12 में उल्लिखित दोनों आधारों पर मामले की पुनर्स्थापना का कोई अवसर उपस्थित होने की सम्भावना नहीं है ।

बकौल उर्वशी अधिनियम में मनमानी और निरंकुश पेनल्टी का कोई भी प्राविधान नहीं है और यदि कोई आयुक्त जन सूचना अधिकारी की गलती न होते हुए भी बिना जनसूचना अधिकारी को सुने ही मनमाना दंडादेश पारित कर रहा है या यदि कोई आयुक्त नियत तिथि से इतर तिथि पर सुनवाई करते हुए जनसूचना अधिकारी की अनुपस्थिति में दंडादेश पारित कर रहा है तो यह माना जाना चाहिए कि यह कृत्य या तो सम्बंधित सूचना आयुक्त का जन सूचना अधिकारी के प्रति दुर्भावना से दंड लगाने के कदाचार और नैतिक अधमता का कृत्य है अथवा सम्बंधित सूचना आयुक्त सूचना कानून को समझकर अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में मानसिक रूप से अक्षम है जिसके लिए सम्बंधित सूचना आयुक्त के खिलाफ सूचना कानून की धारा 17 के तहत कार्यवाही आरम्भ करके सूचना आयुक्त को बर्खास्त किया जाना आवश्यक है ।

बकौल उर्वशी जनसूचना अधिकारी पर दण्ड अधिरोपण के पश्चात सम्बंधित मामले की पुनर्स्थापना और दंड बापसी कुछेक मामलों में अपवाद स्वरुप ही होनी चाहिए किन्तु दुर्भाग्य का विषय है कि उत्तर प्रदेश के कुछ सूचना आयुक्तों द्वारा अधिकांश मामलों में पहले तो सूचना कानून की धारा 20 के तहत जनसूचना अधिकरियों पर मनमाने ढंग से अर्थदण्ड लगाया जा रहा है और निहित स्वार्थ पूरे होने पर अधिरोपित अर्थदण्ड बापस लेने का रैकेट अपने सुनवाई कक्ष के स्टाफ के साथ मिलकर चलाया जा रहा है ।

उर्वशी ने बताया कि उनको उम्मीद है कि उनकी इस शिकायत पर माकूल कार्यवाही होगी और निहित स्वार्थों के लिए दंड लगाने और माफ करने का खेल करने वाले सूचना आयुक्त जल्द ही कानून के शिकंजे में कसे जायेंगे ।

Urvashi Sharma
Mobile 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081

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